Saturday, 3 August 2013

मेरे सभी प्रिय दोस्तों को होली की हार्दिक शुभकामनाए

मेरे सभी दोस्तों को निवेदन हे की आप सभी विल्लिवाकम भडेर चेन्नई में जरुर आइये
और आप सभी जने चंग फागन का आनन्द लीजिये और साथ में ढोल के डाका पर डांडिया
गेर का आनन्द लीजिये और आप सभी जने मारवाड़ी पोसाक में जरुर आना
कल होली दहन हैं और हम सब इसको बड़ी ही धूम धाम से मनाते आ रहे हैं
कल रात को होली दहला दी जाएगी पल-पल की खुसिया से सा जायेंगे
क्रोध को छोड़ देंगे मुस्कराट जोड़ देंगे
भूले हुये मार्ग को ढूंड लेंगे अपनी मंजिल बना देंगे
एक दुसरे के रंग में डूब जायेंगे
दुश्मनो को दोस्त बना देंगे
रिस्तो की बोहार बिछा देंगे
एक दुसरो को गले लगायेगे
रंगों की खूब बोछार करेंगे
शेर कभी छुपकर शिकार नहीं करते
बुजदिल कभी खुलकर वार नहीं करते
हम वोह हे जो होली खेलने के लिये
होली का इंतजार नहीं करते
होली एक पवित्र त्यौहार हैं इसको मिठास के साथ मनाये पुरे परिवार और पुरे समाज के साथ मिलकर
इसको पवित्र बनाये पक्के रंग व् गुलाल उड़ेल कर इस पवित्र का त्यौहार मनाये
यह होली अपनों का त्यौहार हैं प्यार ओर मिठास का त्यौहार हैं मान ओर सम्मान का त्यौहार हैं
इस होली को यादगार बनाये 

इसी आशा के साथ आपका अपना दोस्त ( सीरवी सुखाराम सोलंकी )
मेरे सभी प्रिय दोस्तों को जय माता दी और राम-राम सा
दोस्तों यह गेर मण्डली सीरवी समाज ट्रस्ट विल्लिवाकम चेन्नई की हे
यह गेर राठोडी गेर कहलाती हे यह मारवाड़ की परम्परा हे
रंग रंगीलो म्हारो राजस्थान मारवाड़ी पोसाक में गेर का न्रत्यु करते हुये
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http://www.youtube.com/watch?v=DTCQlaSmGnQ

अगर छुआ मंदिर तो तुझे दिखा देंगे, हम तुझको तेरे औकात दिखा देगे।
जय सिया राम जय सिया राम, रघुपति राघव राजा राम।

इधर उठी जो आँख तुम्हारी, चमकेगी तलवार, कटारी।
खून से इस धरती को हम नहला देंगे, हम तुझको तेरी औकात दिखा देंगे।

अगर आस्था अप्मान्ति होगी तो फिर एक अयोध्या होगी।
राम के खातिर अपना सिष कटा देंगे, हम तुझको तेरी औकात बता देंगे।

दर्द है दिल है गर्द नहीं है यहाँ कोई नामर्द नहीं है।
हम हनुमान है लंका तेरी जल देंगी, हम तुझको तेरी औकात बता देंगे।

वैसे तो कोई बैर नहीं नहीं है लडे तो तेरी खैर नहीं है।
हर मीनार पर केसरिया लहरा देंगे, हम तुझको तेरी औकात बता देंगे।

कहता हु मै बात सही है मरने का कोई खौफ नहीं है।
अगर उठे तो इस दुनिया से तुझे उठा देंगे, हम तुझको तेरी औकात बता देंगे।

लगा के मजलिस हमें न घेरो, बहुत हो गया अब न छेरो।
वरना बेतर्क ईट से ईट बजा देंगे, हम तुझको तेरी औकात बता देंगे।

वन्देमातरम गाना होगा वरना यहाँ से जाना होगा।
नहीं गए तो जबरन तुझे भगा देंगे, हम तुझको तेरी औकात बता देंगे।
कश्मीर तो होगा लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा...

हम डरते नहीं किसी अणु-बमों से, विस्फोटों और तोपों से,
हम डरते है ताशकंद और शिमला जैसे समझौतों से,
सियार-भेडियों से डर सकती सिहों की ऐसी औलाद नहीं,
भरतवंश के इस पानी की है तुमको पहचान नहीं,

एटम बनाकर के तुम किस मद में फूल गए,
पैसठ, इकहत्तर और निन्यानवे के युद्धों को तुम भूल गए,
तुम याद करो अब्दुल हमीद ने पैटन टैंक जला डाला,
हिन्दुस्तानी नेटो ने अमरीकी जेट जला डाला,

तुम याद करो नब्बे हजार उन बंदी पाक जवानों को,
तुम याद करो शिमला समझौता इंदिरा के एहसानों को,
पाकिस्तान ये कान खोलकर सुन ले, अबकी जंग छिड़ी तो यह सुन ले,
नाम निशान नहीं होगा, कश्मीर तो होगा लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा...

लाल कर दिया लहू से तुमने श्रीनगर की घाटी को,
तुम किस गफलत में छेड़ रहे सोई हल्दी घाटी को,
जहर पिलाकर मजहब का इन कश्मीरी परवानों को,
भय और लालच दिखलाकर तुम भेज रहे नादानों को,

खुले प्रशिक्षण, खुले शस्त्र है खुली हुई शैतानी है,
सारी दुनिया जान चुकी ये हरकत पाकिस्तानी है,
बहुत हो चुकी मक्कारी, बस बहुत हो चुका हस्तक्षेप,
समझा ले अपने इस नेता को वरना भभक पड़ेगा पूरा देश,
क्या होगा अंजाम तुम्हेन अब इसका अनुमान नहीं होगा,
नाम निशान नहीं होगा, कश्मीर तो होगा लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा....

भारत माता की जय
वन्दे मातरम 
यह एक साध्वी दुआरा गाया हुआ लेख हे

लेखक
सीरवी सुखाराम s/o हीरालालजी सोलंकी
श्री सीरवी सेवा मंण्डल विल्लिवाकम चेन्नई
मरुधर में ( कुशालपुरा रायपुर मारवाड़ )

वाह मनमोहन वाह कोनसा मोनव्रत रखा हे आपने
यह मोनव्रत अब भारी पड़ने लगा हे हिन्दुस्थान को
चीन तो एक बाद एक चाल चल रहा हे
चीन ने फिर से अपने भोहे तान रखी हे लदाख पर

वाह मनमोहन वाह कोनसा मोनव्रत रखा हे आपने
यह मोनव्रत अब भारी पड़ने लगा हे हिन्दुस्थान को
चीन अपनी ओकात में आ जाना वरना भारी पड़ेगी यह जंग
मत सोच यह की हिन्दुस्थान कुछ नहीं कर सकता
अब यह सोचले की कही तुम्हे उलटे पाँव ही दोड़ना पड जाय

वाह मनमोहन वाह कोनसा मोनव्रत रखा हे आपने
यह मोनव्रत अब भारी पड़ने लगा हे हिन्दुस्थान को
हिन्दुस्थानी फोजी ने अमेरिकी नोटों को जला डाला
चीन कान खोलकर सुन ले हमारी सरकार नपुसंग हे
वरना 
हिन्दुस्थान तो होगा चीन का नामो निसान नहीं होगा

वाह मनमोहन वाह कोनसा मोनव्रत रखा हे आपने
यह मोनव्रत अब भारी पड़ने लगा हे हिन्दुस्थान को
नेहरु ने तो कह दिया की हिन्दू चीनी भाई भाई
चीन तुमने तो विश्वास ज्ञात किया अब तो हद हो गयी हे
अब तो एक एक हिन्दुस्तानी तेरे चीन पर भारी पड़ेगा

वाह मनमोहन वाह कोनसा मोनव्रत रखा हे आपने
यह मोनव्रत अब भारी पड़ने लगा हे हिन्दुस्थान को
सेना के बंधे हाथ को खोलदे यही सही समय हे हिन्दुस्थान का
वर्ना मुसीबत में न फस जाये हिन्दुस्थानी चीनी की चाल में
अब अटेकिंग होगा तो वोह होगा पहाड़ी वालो जंगलो में

वाह मनमोहन वाह कोनसा मोनव्रत रखा हे आपने
यह मोनव्रत अब भारी पड़ने लगा हे हिन्दुस्थान को
हिन्दुस्तानी सरकार सेना कहती एक बार हाथ खोलकर तो देख
चीन को सबक सिखाये बिना रहेंगे नहीं
चीन की चाल में उसी को फसा देंगे बिज्जिंग में पीठ बिछा देंगे हम

वाह मनमोहन वाह कोनसा मोनव्रत रखा हे आपने
यह मोनव्रत अब भारी पड़ने लगा हे हिन्दुस्थान को

लेखक
सीरवी सुखाराम सोलंकी चेन्नई कोलथूर
( मारवाड़ में कुशालपुरा तहसील रायपुर जिला पाली )

माया चक्र
मत खोना ईस माया चक्र में
यह माया तेरी कर जायेगी काया
तुम माया में खो गयो
अपने माता पिता को भूल गयो
मत खोना ईस माया चक्र में
यह माया तेरी कर जायेगी काया
तुम माया में खो गयो
अपने पुत्र पुत्री को भूल गयो
मत खोना ईस माया चक्र में
यह माया तेरी कर जायेगी काया
तुम माया में खो गयो
अपने परिवार को भूल गयो
मत खोना ईस माया चक्र में
यह माया तेरी कर जायेगी काया
तुम माया में खो गयो
अपने दोस्तों को भूल गयो
मत खोना ईस माया चक्र में
यह माया तेरी कर जायेगी काया
तुम माया में खो गयो
तुम भगवान को भूल गयो
मत खोना ईस माया चक्र में
यह माया तेरी कर जायेगी काया
तुम माया में खो गयो
तेरी माया गयी तुमको सबकी याद आई
फिर तुम कोने कोने भट्कियो
तुम माया को दोस दियो
माया बोली मेरा किया कसूर
तुम तो माया आने पर ईतरो घमण्ड करियो
की तेरा कोई हे नहीं येही तेरा फल तुमको मिला
फिर तुमने अपने आप को खूब कोसियो
मत खोना ईस माया चक्र में
यह माया तेरी कर जायेगी काया

लेखक
सुखाराम सोलंकी सीरवी
श्री सीरवी सेवा मंण्डल विल्लिवाकम चेन्नई



कलम उठा ही ली है तो धर्म लिखूंगा,
वेदों का ज्ञान, गीता का मर्म लिखूंगा...
मात्र कविताएं लिख देने से सैलाब नहीं आते,
बस मुट्ठियाँ भींच लेने से इन्कलाब नहीं आते,
इन्कलाब आते हैं अविरल उद्यम से, श्रम से,
सदा सत्य समर्पित निरंतर साधना के क्रम से,
उद्वेलित होना काफी नहीं, अब कर्म करो,
राष्ट्र-हित में जीओ, राष्ट्र-हित ही धर्म करो,
राष्ट्र सर्वोपरि है, यही महाभारत औरगीता का सार है,
इसकी रक्षा में पितामह इश्वर से भी लड़ने को तैयार है !
कर्महीन और पलाए को नपुंसक बताया था,
बंसी छोड़ कृष्ण ने रणभेरी शंख बजाया था !
इसलिए खाली मत बैठो, यौवन न गंवाओ,
ओ गर्म खून वालों ! माँ की लाज बचाओ !
हर ह्रदय को जोश से भर दो,
जय हिंद बोलो नहीं, कर दो

लेखक
सीरवी सुखाराम s/o हीरालालजी सोलंकी
श्री सीरवी सेवा मंण्डल विल्लिवाकम चेन्नई
मरुधर में ( कुशालपुरा रायपुर मारवाड़ )