Saturday, 3 August 2013

कश्मीर तो होगा लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा...

हम डरते नहीं किसी अणु-बमों से, विस्फोटों और तोपों से,
हम डरते है ताशकंद और शिमला जैसे समझौतों से,
सियार-भेडियों से डर सकती सिहों की ऐसी औलाद नहीं,
भरतवंश के इस पानी की है तुमको पहचान नहीं,

एटम बनाकर के तुम किस मद में फूल गए,
पैसठ, इकहत्तर और निन्यानवे के युद्धों को तुम भूल गए,
तुम याद करो अब्दुल हमीद ने पैटन टैंक जला डाला,
हिन्दुस्तानी नेटो ने अमरीकी जेट जला डाला,

तुम याद करो नब्बे हजार उन बंदी पाक जवानों को,
तुम याद करो शिमला समझौता इंदिरा के एहसानों को,
पाकिस्तान ये कान खोलकर सुन ले, अबकी जंग छिड़ी तो यह सुन ले,
नाम निशान नहीं होगा, कश्मीर तो होगा लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा...

लाल कर दिया लहू से तुमने श्रीनगर की घाटी को,
तुम किस गफलत में छेड़ रहे सोई हल्दी घाटी को,
जहर पिलाकर मजहब का इन कश्मीरी परवानों को,
भय और लालच दिखलाकर तुम भेज रहे नादानों को,

खुले प्रशिक्षण, खुले शस्त्र है खुली हुई शैतानी है,
सारी दुनिया जान चुकी ये हरकत पाकिस्तानी है,
बहुत हो चुकी मक्कारी, बस बहुत हो चुका हस्तक्षेप,
समझा ले अपने इस नेता को वरना भभक पड़ेगा पूरा देश,
क्या होगा अंजाम तुम्हेन अब इसका अनुमान नहीं होगा,
नाम निशान नहीं होगा, कश्मीर तो होगा लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा....

भारत माता की जय
वन्दे मातरम 
यह एक साध्वी दुआरा गाया हुआ लेख हे

लेखक
सीरवी सुखाराम s/o हीरालालजी सोलंकी
श्री सीरवी सेवा मंण्डल विल्लिवाकम चेन्नई
मरुधर में ( कुशालपुरा रायपुर मारवाड़ )

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