महाराणा प्रताप की जयंती पर मेरा एक लेख
राम जन्म में दूध मिला, क्रष्ण जन्म में घी मिला,
राजस्थान की धरती को महाराणा प्रताप मिला "
हल्दी घाटी मे खुसिया में छा गयी, चारो और गावे मंगल गीत "
खूब लड़े थे हल्दी घाटी मे लोहा लेने शत्रु का
चेतक की सवारी थी तुम्हारी, कोई नहीं पकड़ पाता तुमको "
जितना शरीर था उससे, ज्यादा उसकी शक्ति थी"
तुम्हारे भाले और तलवार से काप जाते शत्रु"
रन भूमि ने कोई नहीं हरा पाईया तुमको "
अपने बल ओर ताकत से,शत्रु को को खदेड़ डाला"
न घर था, नहीं दरबार ,जंगल ही सब कुछ था तुम्हारा"
खूब दोडाये जंगलो में चेतक, कोई नहीं कर सका तुम्हारा मुकाबला "
नहीं थी तुमको अपने प्राण की चिंता "
हल्दी घाटी बचाने के लिए त्याग दिए अपने प्राण "
तुम्हारे जीते जी अकबर भी नहीं कर सका हल्दी घाटी में राज"
प्रथम प्रतापी महाराणा वीर थे ,तुमने आजादी की लड़ाई लड़ी थी"
आज हे आपकी जयंती, ( सीरवी सुखाराम सोलंकी करे तुम्हारा गुणगान )
( जय जय महाराणा प्रताप -- जय जय महाराणा प्रताप )
लेखक
सीरवी सुखाराम सोलंकी चेन्नई मारवाड़ में (कुशालपुरा )
सीरवी सुखाराम सोलंकी चेन्नई मारवाड़ में (कुशालपुरा )


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