एक लेख सीरवी सुखाराम सोलंकी की कलम से दीवान श्री माधवसिंह जी को
सीरवी समाज के धर्मगुरु दीवान श्री माधवसिंह जी को हमारा यह ख़त हे
धर्मगुरु को धर्म प्रचार करना चाहिए राजनीती का प्रचार नहीं
धर्मगुरु को समाज को बनाना हे राजनीती को नहीं बनाना
धर्मगुरु को समाज का समान बढ़ाना चाहिए राजनीती की नहीं
धर्मगुरु को समाज को न्या मार्ग बनाना चाहिए राजनीती का मार्ग नहीं
धर्मगुरु का सबसे बड़ा समान समाज से होता हे राजनीती से नहीं
धर्मगुरु को सबसे बड़ा प्यार धर्म से होना चाहिए राजनीती से नहीं
धर्मगुरु को कभी राजनीती में नहीं आना चाहिए धर्म को निभाना चाहिए
राजनीती तो वोही कर सकता जिसमे राज करने की योगता हो
राजनीती में ना तो इज्जत होती हे ना ही समान
राजनीती सब रुपये से खेला जाता हे नहीं ईमानदारी से
ईमानदारी से वोही राजनीती में आ सकता हे
जिसमे
लेखक
सीरवी सुखाराम सोलंकी
(चेन्नई मारवाड़ में कुशालपुरा )


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