Saturday, 3 August 2013


एक लेख सीरवी सुखाराम सोलंकी की कलम से दीवान श्री माधवसिंह जी को

सीरवी समाज के धर्मगुरु दीवान श्री माधवसिंह जी को हमारा यह ख़त हे

धर्मगुरु को धर्म प्रचार करना चाहिए राजनीती का प्रचार नहीं
धर्मगुरु को समाज को बनाना हे राजनीती को नहीं बनाना

धर्मगुरु को समाज का समान बढ़ाना चाहिए राजनीती की नहीं
धर्मगुरु को समाज को न्या मार्ग बनाना चाहिए राजनीती का मार्ग नहीं

धर्मगुरु का सबसे बड़ा समान समाज से होता हे राजनीती से नहीं
धर्मगुरु को सबसे बड़ा प्यार धर्म से होना चाहिए राजनीती से नहीं

धर्मगुरु को कभी राजनीती में नहीं आना चाहिए धर्म को निभाना चाहिए
राजनीती तो वोही कर सकता जिसमे राज करने की योगता हो

राजनीती में ना तो इज्जत होती हे ना ही समान
राजनीती सब रुपये से खेला जाता हे नहीं ईमानदारी से

ईमानदारी से वोही राजनीती में आ सकता हे 


जिसमे
ध्रढ सकती की अपार सीमाए हे




लेखक



सीरवी सुखाराम सोलंकी
(चेन्नई मारवाड़ में कुशालपुरा )

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